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दुनिया

जो बाइडेन के फोन के इंतजार में इमरान खान, नहीं बजा ‘टेलिफोन’ तो छलका दर्द, पाक NSA ने कही ये बात

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अमेरिका के राष्ट्रपति पद को संभाले हुए जो बाइडेन (Joe Biden) को छह महीने से अधिक का वक्त हो चुका है. मगर उन्होंने अभी तक पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान (Imran Khan) को फोन नहीं किया है. ऐसे में पाकिस्तान (Pakistan) में खासा निराशा है. बाइडेन के फोन के इंतजार में बैठी इमरान सरकार का दर्द पड़ोसी मुल्क के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार मोईद युसूफ (Moeed Yusuf) के बयानों से मिलता है. पाकिस्तानी एनएसए ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति का पाकिस्तानी प्रधानमंत्री को फोन नहीं करना मेरी समझ से परे है. गौरतलब है कि भारत समेत कई देशों के राष्ट्रध्यक्षों से बाइडेन फोन पर बातचीत कर चुके हैं.

मोईद युसूफ का कहना है कि इस्लामाबाद के साथ रिश्ते सुधारने में वाशिंगटन के प्रयास की कमी उन्हें हैरान करती है. युसूफ ने फाइनेंशियल टाइम्स को वाशिंगटन में पाकिस्तान के दूतावास में दिए एक इंटरव्यू में कहा, अमेरिका के राष्ट्रपति ने इतने महत्वपूर्ण देश के प्रधानमंत्री से बात नहीं की है, जो जिसे लेकर अमेरिका खुद कहता है कि ये मेक-और-ब्रेक वाला मामला है. हम अमेरिकी इशारे को समझने में कठिनाई देख रहे हैं? उन्होंने कहा, हमें हर बार कहा जाता है कि फोन कॉल आएगा. ये कोई तकनीकी समस्या है या कुछ और. सच कहूं तो अब लोगों को विश्वास नहीं है.

सही समय आने पर बात करेंगे बाइडेन: अधिकारी

अमेरिकी सेना के अफगानिस्तान छोड़ने के बाद अमेरिका ने तालिबान की प्रगति को रोकने के लिए पाकिस्तान से बात की है. मगर बाइडेन ने अभी तक इस मामले पर पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान से बात नहीं की है. वाशिंगटन के व्यवहार को नाराजगी व्यक्त करते हुए युसूफ ने कहा, अगर सुरक्षा संबंध एक रियायत है, एक फोन कॉल रियायत है तो पाकिस्तान के पास विकल्प है. वहीं, पाकिस्तानी एनएसए के बयान पर टिप्पणी करते हुए बाइडेन प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, अभी तक कई वैश्विक नेता हैं, जिनसे बाइडेन ने बात नहीं की है. जब सही समय आएगा तो इमरान खान से बात की जाएगी.

अमेरिका दौरे पर हैं मोईद युसूफ

अफगान समस्या को लेकर बातचीत करने के लिए मोईद युसूफ वाशिंगटन डीसी में हैं. उनके पास पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI के मुखिया भी हैं. गौरतलब है कि पाकिस्तान ने अफगानिस्तान सीमा पर 90 फीसदी तक फेंसिंग कर दी है. पाकिस्तान को डर है कि तालिबान की हिंसा से बचने के लिए लाखों की संख्या में अफगानी शरणार्थी पाकिस्तान में आ सकते हैं. यही वजह है कि वह अमेरिका से अफगान समस्या को लेकर चर्चा करना चाहता है.

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