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शंकर शर्मा ने बनाई भारत में आ रहे Internet IPOs से दूरी, जानिए क्या है वजह

sankar

फर्स्ट ग्लोबल (First Global)के शंकर शर्मा को  दलाल स्ट्रीट की बिग बियर के नाम से भी जाना जाता है। वे देश की Internet IPOs नें जोखिम उठाने की जल्दबाजी में नहीं हैं। मनीकंट्रोल से हुई हालिया बातचीत में उन्होंने बताया कि वे भारत में आ रहे Internet IPOs क्यों दूरी बनाए हुए हैं।

Ixigo भारत की इंटरनेट आधारित सबसे लेटेस्ट कंपनी है जो अपना आईपीओ लेकर आने  वाली है। इसने अपने आईपीओ के लिए सेबी में पेपर भी दाखिल कर दिए हैं। Policy Bazaar, Mobikwik, Paytm और Nykaa जैसी कंपनियां भी इस कतार में पहले से शामिल हैं।

Zomato के ब्लॉकबस्टर लिस्टिंग ने इस बात की उम्मीद बढ़ा दी है कि भारतीय इक्विटी मार्केट में नए दौर के टेक्नोलॉजी आधारित तेजी से ग्रो कर रही लेकिन अभी घाटे में चल रही कंपनियों के लिए भूख है।

फर्स्ट ग्लोबल (First Global)के शंकर शर्मा को  दलाल स्ट्रीट की बिग बियर के नाम से भी जाना जाता है। वे देश की Internet IPOs नें जोखिम उठाने की जल्दबाजी में नहीं हैं। मनीकंट्रोल से हुई हालिया बातचीत में उन्होंने बताया कि वे भारत में आ रहे Internet IPOs क्यों दूरी बनाए हुए हैं।

क्या Zomato भारत का अगला Infosys, TCS या HDFC Bank बंन सकता है। इस सवाल पर शंकर शर्मा ने कहा कि मेरा मानना है कि 1977 में आए Reliance IPO के बाद Zomato IPO देश का दूसरा सबसे हंगामा खेज आईपीओ रहा। Zomato IPO के साथ ही भारत में टेक आधारित कंपनियों में निवेश की इच्क्षुक निवेश की एक नई पीढ़ी उभर कर सामने आई है।

मुझमें ये देख के काफी रोमांच पैदा हो रहा है कि बाजार ने एक नए दौर की 10 साल से भी कम पुरानी कंपनी को इतना अच्छा रिस्पॉन्स दिया है। ऐसा रिस्पॉन्स इससे पहले सिर्फ NASDAQ पर देखने को मिला है। जहां तक ये सवाल है कि क्या ये अगली Infosys, TCS बन सकती है, तो इस पर मैं सिर्फ इतना कहना चाहूंगा कि फिलहाल अभी मैं इस क्षण की खुशीमहसूस कर रहा हूं। मैं अभी बहुत आगे की नहीं सोचना चाहता हूं।

क्या शंकर शर्मा इंडियन इंटरनेट आधारित आईपीओ में निवेश करना चाहेंगे। इस सवाल का जवाब देते हुए शर्मा ने कहा कि हम अपनी नीतियों के तहत आईपीओ में निवेश नहीं करते।

जोमैटो अपने में अपवाद साबित हुआ है। सामान्य तौर पर देखें तो आईपीओ में निवेशकों के बहुत ज्यादा पैसे नहीं बनते हैं। इसकी वजह सिर्फ यह नहीं है कि कोई कंपनी घाटे में चल रही है। इसकी कई वजहें हो सकती हैं। इसका उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया था कि जब भारती एयरटेल की लिस्टिंग हुई थी वो भी घाटे में चल रही थी।

उन्होंने आगे कहा कि जोमैटो जैसी ई-कंपनियों का बिजनेस मॉडल कोई नया मॉडल नहीं है। ऑनलाइन ब्रोकर्स पहले से ही भारत में हैं। जिनका कारोबार टेक्नोलॉजी पर ही चलता है। सवाल ये है कि जोमैटो जैसी कंपनी कब तक मार्केट शेयर हथियाने के लिए डिस्काउंट और तमाम तरह के फ्री ऑफर दे कर अपने पैसे गला सकती हैं।

इनके सामने चुनौती ये है कि क्या इस तरह की कंपनियां बगैर डिस्काउंट और मुफ्त ऑफरों के बाजार में टिके रह सकती हैं?  यह इनके साथ जुड़ी एक बुनियादी समस्या है।

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