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उत्तराखंड

उत्तराखंड में हर साल 60 लोग जंगली जानवरों के हमले में गवां रहे हैं जान, गुलदार-बाघ के हमले सबसे ज्यादा

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उत्तराखंड में हर साल औसतन 60 से अधिक लोग जंगली जानवरों के हमले में जान गंवा रहे हैं। पर इनमें से करीब आधे (30) लोगों की मौत का कारण बाघ व गुलदार बन रहे हैं। यह चौकाने वाला खुलासा सूचना अधिकार के तहत हुआ है। जानवरों के हमले में इंसानों की मौत का यह औसत महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, कर्नाटक जैसे बड़े राज्यों से भी ज्यादा है। वहीं प्रदेश में 45 गुलदार व चार बाघ आदमखोर घोषित करने के बाद मार दिए गए। आरटीआई के तहत वन विभाग से बीते दस सालों में मानव वन्यजीव संघर्ष के आंकड़ों की जानकारी मिली है

रिपोर्ट में प्रदेश में 603 लोगों की मौत जंगली जानवरों के हमलों में हुई है। जिसमें से सबसे ज्यादा 236 लोगों को गुलदार ने अपना शिकार बनाया है। वहीं साल 2017 के बाद से गुलदार के हमलों में जान गंवाने वाले लोगों की संख्या में लगातार इजाफा हुआ है। अकेले 2021 में ही अब तक गुलदार 14 लोगों की जान ले चुका है। इंसानों की जान लेने में गुलदार के बाद हाथी का नंबर है। 127 लोग हाथी के हमले में अब तक मारे गए हैं। ज

उत्तराखंड में 839 गुलदार, सबसे ज्यादा शिकार
भारतीय वन्यजीव संस्थान की बीते साल जारी रिपोर्ट के अनुसार उत्तराखंड में 839 गुलदार हैं। इनकी संख्या लगातार बढ़ रही है। जिस कारण गुलदार के इंसानों पर हमले भी ज्यादा बढ़ रहे हैं। जंगली जानवरों के अवैध व्यापार पर नजर रखने वाली संस्था ट्रैफिक इंडिया के अनुसार उत्तराखंड में गुलदार ही सबसे ज्यादा मारे जा रहे हैं। पांच सालों में 140 गुलदारों की खाल, हड्डियां व अन्य अंग बरामद किए। गुलदार का सबसे ज्यादा शिकार, उसकी खाल और हड्डियों के लिए किया गया। 

इंसानों पर हमले
जानवर    इंसानों की मौत

गुलदार    236
हाथी       127
बाघ        37
भालू        37
अन्य       166

वन्यजीवों के हमलों को कम करने के लिए वृहद स्तर पर शोध हो रहा है। हम हमलों के पीछे वन्यजीवों का व्यवहार व उनकी प्रवृत्ति को समझने की कोशिश कर रहे हैं। जिसमें कुछ अच्छे बिंदु सामने आए हैं। हरिद्वार, नरेंद्रनगर सहित कई अन्य इलाकों में गुलदार व बाघ की रेडियोकॉलर ट्रेकिंग भी चल रही है। प्रदेश में बाघ व गुलदार की संख्या बढ़ी है, आप देखेंगे कि बाघ के हमले कुछ सालों से नहीं हुए। गुलदार के हमले का ज्यादा प्रभाव सघन वनों के आसपास के इलाकों में हैं। 

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