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बुरी खबर! बहुत महंगा हो गया कच्चा तेल, भारत में ऐसे बढ़ सकती है परेशानी

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अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तेजी देखी जा रही है जो भारत में पेट्रोल और डीजल के लिहाज के अच्छी नहीं है। आने वाले दिनों में इसका सीधा असर देश में पेट्रोल और डीजल की बढ़ी हुई कीमतों के रूप में देखने को मिल सकता है।

नई दिल्ली, रॉयटर्स/बिजनेस डेस्क। रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध का असर अब कच्चे तेल पर साफ नजर आने लगे है। ब्रेंट क्रूड के दाम लगातार बढ़ते जा रहे हैं। तेल की कीमतों में गुरुवार को तेजी देखी गई। ब्रेंट 116 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बढ़ गया, क्योंकि यूक्रेन पर हमले के कारण रूस पर लगे प्रतिबंधों से व्यापार में व्यवधान और शिपिंग में परेशानी ने आपूर्ति की चिंताओं को पैदा कर दिया है। ब्रेंट क्रूड वायदा बढ़कर 116.83 डॉलर प्रति बैरल हो गया, जो अगस्त 2013 के बाद सबसे अधिक है। बीते कुछ दिनों से इसमें लगातार तेजी देखी जा रही है। बुधवार को यह 113 डॉलर प्रति बैरल को पार कर गया था।

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हालांकि, इन सब चीजों की अनदेखी करते हुए पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संगठन और रूस सहित सहयोगियों ने कीमतों में वृद्धि के बावजूद मार्च में प्रति दिन 400,000 बैरल उत्पादन में वृद्धि बनाए रखने का फैसला किया है। ऐसे में अगर इसकी सप्लाई बाधित नहीं होती है तब तो ठीक है लेकिन अगर सप्लाई बाधित हुई तो पूरी संभावना है कि आने वाले कुछ दिनों में भारत में पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ सकते हैं।

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हाल के दिनों में कई मीडियो रिपोर्ट्स में इसकी आशंका जताई जा रही है कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण देश में पेट्रोल और डीजल के दामों में भी इजाफा हो सकता है, जो आम आदमी को सीधे तौर पर ज्यादा खर्च के लिए मजबूर करेगा जबकि भारत ने बीते साल के अंत में ही कुछ कदम उठाते हुए पेट्रोल-डीजल की कीमतों को स्थिर करने में कामयाबी हासिल की थी।

इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (आइईए) के अनुसार, रूस दुनिया का नंबर 3 तेल उत्पादक और वैश्विक बाजारों में तेल का सबसे बड़ा निर्यातक है। एजेंसी ने कहा कि रूसी कच्चे और तेल उत्पादों का निर्यात दिसंबर में प्रति दिन 7.8 मिलियन बैरल तक पहुंच गया था।

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