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PFI नेताओं के ठिकानों पर रेड से पहले खुफिया एजेंसियों ने दिए थे ये इनपुट, जानिए कैसे की गई थी प्लानिंग

PFI Banned in India: एनआईए को खुफिया एजेंसियों ने पीएफआई के नेताओं के जीपीएस लोकेशन उपलब्ध कराए थे. इसके बाद छापेमारी की गई थी.

PFI Banned in India: पीएफआई नेताओं के ठिकानों पर कार्रवाई को लेकर अब बड़ी खबर सामने आ रही है. सुरक्षा एजेंसियों के सूत्रों ने बताया कि एनआईए को खुफिया एजेंसियों ने पीएफआई के नेताओं के जीपीएस लोकेशन उपलब्ध कराए थे. इसके बाद छापेमारी की गई थी. पीएफआई के जिन नेताओं के यहां छापे डाले जाने थे उनका जीपीएस लोकेशन पिन-प्वाईट कर एनआईए और ईडी को मुहैय्या कराई गई थी. ताकि रेड के लिए जाने वाली टीम सही ठिकाने पर कार्रवाई कर सके. सूत्रों के मुताबिक इसके लिए कई महीनों से पीएफआई के हर बड़े काडर पर खास नजर रखी जा रही थी. पीएफआई के खिलाफ की जाने वाली कार्रवाई की सीक्रेसी का अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि रेड से कुछ ही घंटे पहले राज्यों की पुलिस को इसकी जानकारी शेयर की गई थी.

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पीएफआई के खिलाफ रेड से पहले रात को 12 बजे राज्यों की पुलिस के साथ पीएफआई के खिलाफ की जाने वाली जानकारी शेयर की गई थी. ताकि रेड की जानकारी बाहर लीक न हो. यहीं नहीं छापे से एक दिन पहले एक बार फिर से सभी पीएफआई नेताओं की करेंट लोकेशन की जानकारी हासिल की गई थी. ताकि कोई भी पीएफआई का बड़ा काडर बच न पाये.

PFI पर बैन जारी रहेगा या नहीं ये ट्रिब्यूनल करेगा फैसला

केंद्र सरकार ने दिल्ली हाई कोर्ट के जज जस्टिस दिनेश शर्मा को यूएपीए ट्रिब्यूनल का पीठासीन अधिकारी नियुक्त किया है. ये ट्रिब्यूनल ही पीएफआई और उससे जुड़े संगठनों पर केंद्र सरकार की ओर से लगाये गए प्रतिबंध की समीक्षा करेगा. किसी संगठन पर केन्द्र सरकार की ओर से लगाये प्रतिबंध की यूएपीए ट्रिब्यूनल से पुष्टि करानी ज़रूरी होती है.

PFI और उससे जुड़े संगठनों पर लगा है बैन

बता दें कि 28 सितंबर को केंद्र सरकार में पीएफआई और उससे जुड़े संगठनों को UAPA के सेक्शन 3(1) के तहत मिले अधिकार का इस्तेमाल करते हुए 5 साल के लिए बैन लगा दिया था. सरकार ने पीएफआई के अलावा रेहाब इंडिया फाउंडेशन, कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया, ऑल इंडिया इमाम कॉउन्सिल, नेशनल कंफेडरेशन ऑफ ह्यूमन राइट्स ऑर्गेनाइजेशन, नेशनल वीमेन फ्रंट, जूनियर फ्रंट, एम्पावर इंडिया फाउंडेशन और रेहाब फाउंडेशन केरल पर प्रतिबंध लगा दिया है. सरकार का कहना था कि इन संगठनों के वैश्विक आतंकी संगठनों से सम्बन्ध है. ये देश की एकता, अखंडता और सम्प्रभुता को नुकसान पहुंचाने के मकसद से लगातार ग़ैर क़ानूनी गतिविधियों में शामिल रहे है.

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ट्रिब्यूनल करेगा सरकार की ओर से लगाये गए बैन की पुष्टि

नियमों के मुताबिक किसी संगठन पर केन्द्र सरकार की ओर से लगाये प्रतिबंध की यूएपीए ट्रिब्यूनल से पुष्टि करानी ज़रूरी होती है. यूएपीए के सेक्शन 3 के मुताबिक किसी संगठन को ग़ैरकानूनी करार दिये जाने के 30 दिन के अंदर इस बारे में जारी नोटिफिकेशन को सरकार ट्रिब्यूनल के पास भेजती है. इसके बाद ट्रिब्युनल ये तय करता है कि क्या वाकई उस संगठन को ग़ैरकानूनी करार दिए जाने के लिए पर्याप्त वजह है. ट्रिब्यूनल में एक ही सदस्य होते है जो दिल्ली हाई कोर्ट के जज होते हैं.

PFI से जवाब तलब करेगा ट्रिब्यूनल

इस केस में ट्रिब्यूनल पीएफआई उससे जुड़े संगठनों को नोटिस जारी कर 30 दिनों के अंदर जवाब देने को कहेगा. प्रतिबंधित संगठनों से पूछा जाएगा कि क्यों न उन्हें ग़ैरकानूनी घोषित कर दिया जाएगा. उनके जवाब के बाद ट्रिब्यूनल यह तय करेगा कि ये प्रतिबंध जारी रहेगा या नहीं.

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