चैत्र नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ रूपों की आराधना की जाती है। इस दौरान अष्टमी तिथि का विशेष महत्व है। अष्टमी के दिन मां दुर्गा की विशेष पूजा की जाती है। दुर्गाष्टमी पर कई जगहों पर विशेष उत्सवों का आयोजन किया जाता है। आप भी अगर दुर्गाष्टमी की डेट को लेकर कंफ्यूज हैं, तो आइए, हम आपको विस्तार से बताते हैं दुर्गाष्टमी की तिथि और इसका महत्व।
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दुर्गाष्टमी कब है
चैत्र नवरात्रि में दुर्गा अष्टमी 5 अप्रैल को मनाई जाएगी। वैदिक पंचांग के अनुसार, अष्टमी तिथि 4 अप्रैल को रात 8 बजकर 12 मिनट पर शुरू होगी। यह 5 अप्रैल को शाम 7 बजकर 26 मिनट पर समाप्त होगी। इसलिए, पंचांग के अनुसार उदयातिथि के अनुसार दुर्गा अष्टमी 5 अप्रैल को मनाई जाएगी।
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दुर्गाष्टमी का महत्व क्या है
दुर्गा अष्टमी के दिन मां महागौरी की पूजा का विधान है। पौराणिक मान्यता है कि इस दिन पूजा करने से घर में सुख-शांति आती है। परिवार के सदस्यों के बीच प्रेम बढ़ता है और क्लेश दूर होता है। दुर्गा अष्टमी के दिन मां महागौरी की पूजा करने से मनुष्य को आरोग्य की प्राप्ति होती है। वहीं, देवी महागौरी अपने भक्तों में शक्ति और सकारात्मक का संचार करती हैं।
दुर्गाष्टमी की पूजा विधि
ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और मां दुर्गा का ध्यान कर व्रत का संकल्प लें। फिर पूजा स्थान को साफ करें और मां को फल फूल, धूप बत्ती, और घी का दीपक जलाएं। दुर्गा सप्तशती और चालीसा का पाठ करें और अंत में मां की आरती करें। कन्याओं को भोग लगाकर प्रसाद वितरित करें।
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इस साल दुर्गाष्टमी पर बना विशेष संयोग
दुर्गा अष्टमी पर शिववास योग का होना बहुत शुभ माना जा रहा है। शिववास योग निशा काल में है। इसके अलावा, सुकर्मा योग भी है। यह योग भी शुभ फल देने वाला माना जाता है। पुनर्वसु नक्षत्र भी इस दिन है। दुर्गाष्टमी पर माता रानी की पूजा विधि-विधान के साथ करने से माता की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
