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इमरान सरकार की विदाई तय! अविश्वास प्रस्ताव पर वोटिंग से पहले सहयोगी MQM ने विपक्षी पार्टी से मिलाया हाथ

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इमरान खान के नेतृत्व वाली पीटीआई की प्रमुख सहयोगी मुत्ताहिदा कौमी मूवमेंट पाकिस्तान (एमक्यूएम) और विपक्षी दल पीपीपी के बीच एक डील हुई. इसके तहत एमक्यूएम इमरान खान से समर्थन वापस लेगी.

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान को 3 अप्रैल को अविश्वास प्रस्ताव पर बहुमत साबित करना है. वह कुर्सी बचाने के लिए हर हथकंडे अपना रहे हैं, लेकिन इन सबके बीच इमरान खान को मंगलवार देर रात एक बड़ा झटका लगा. रिपोर्ट के मुताबिक, मंगलवार रात इमरान खान के नेतृत्व वाली पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) की प्रमुख सहयोगी मुत्ताहिदा कौमी मूवमेंट पाकिस्तान (एमक्यूएम) और विपक्षी दल पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के बीच एक डील हुई. इसके तहत एमक्यूएम इमरान खान से समर्थन वापस लेगी. रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इस फैसले के बाद अब इमरान खान की सरकार अल्पमत में आ गई है.

कल मीडिया के साथ जानकारी करेंगे साझा

पीपीपी के अध्यक्ष बिलावल भुट्टो जरदारी ने ट्वीट करके बताया कि, “संयुक्त विपक्ष और एमक्यूएम एक समझौते पर पहुंच गए हैं. राबता समिति एमक्यूएम और पीपीपी सीईसी उक्त समझौते की पुष्टि करेंगे और इसके बाद हम कल एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मीडिया को विस्तृत जानकारी देंगे. फिलहला पाकिस्तान को बधाई.”

फ्लोर टेस्ट से पहले बड़ा झटका

बता दें कि इमरान खान सरकार के खिलाफ 31 मार्च से अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा शुरू होगी. इसके बाद 3 अप्रैल को वोटिंग होगी, लेकिन अब जो समीकरण बन गए हैं उश हिसाब से इमरान खान के लिए बहुमत साबित करना असंभव हो गया है. इमरान खान के करीब 30 सांसद बागी हैं. वहीं एमक्यूएम के पास 7 सांसद हैं. अब जबकि एमक्यूएम ने समर्थन वापस लेकर विपक्ष के साथ जाने का फैसला किया है तो इमरान खान बहुमत से काफी पीछे आ गए हैं, जबकि विपक्षी दल ने बहुमत का आंकड़ा जुटा लिया है.

क्या है पाकिस्तान की संसद का पूरा गणित

पाकिस्तान की नेशनल असेंबली 342 सदस्यों की है. यानी यहां बहुमत के लिए 172 सीटों की जरूरत होती है. एमक्यूएम के सरकार से हटने के बाद अब इमरान खान के पास 164 सांसदों का सपोर्ट बचता है. इसमें इमरान की खुद की पार्टी पीटीआई के पास 155, पीएमएलक्यू के पास 4, जीडीए के पास 3, बीएपी के पास 1 (जुबैदा जलाल) और एएमएल के पास 1 सीट है. वहीं विपक्ष की बात करें तो उसके पास बहुमत से ऊपर का आंकड़ा है. इसमें पीएमएल-एन के पास 84, पीपीपी के पास 56, एमक्यूएम के पास 7, एमएमए के पास 14, इंडिपेंडेंट 3, पीएमएल-क्यू 1, एएनपी 1, बीएनपीएम 4, बीएपी 4 और जेडब्ल्यूएपी के पास 1 सीट है. 

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