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वोडाफोन-आइडिया को बड़ी राहत, SEBI ने 1.92 अरब डॉलर के कर्ज को इक्विटी में तब्‍दील करने की दी मंजूरी

vodafone

कनवर्जन के बाद वोडाफोन (Vodafone) में सरकार की हिस्सेदारी 30% से अधिक हो सकती है. इसके साथ ही सरकार वोडाफोन समूह और आदित्य बिड़ला समूह के साथ कंपनी के सबसे बड़े शेयरधारकों में शामिल हो जाएगी.

नई दिल्‍ली. मार्केट रेगुलेटर सेबी ने दूरसंचार ऑपरेटर वोडाफोन-आइडिया (Vodafone idea) को बड़ी राहत देते हुए इसके 1.92 अरब डॉलर के कर्ज को इक्विटी में तब्‍दील करने के सरकार के प्रस्‍ताव को मंजूरी दे दी है. न्यूज एजेंसी रॉयटर्स को दो अधिकारियों ने यह जानकारी दी है. पिछले साल ही भारत ने कर्ज में डूबी दूरसंचार कंपनियों के लिए एक राहत पैकेज को मंजूरी दी थी. इसमें कंपनियों को सरकार के बकाया समायोजित सकल राजस्व बने ब्याज को इक्विटी में बदलने की अनुमति दी गई थी. भारती एयरटेल और रिलायंस इंडस्ट्रीज की जियो समेत देश की तीन प्रमुख टेलीकॉम कंपनियों में से एक वोडाफोन-आइडिया के लिए यह पैकेज बहुत बड़ी राहत लेकर आया था, क्‍योंकि यह दिवालिया होने की कगार पर थी.

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नाम न बताने की शर्त पर एक अधिकारी ने रॉयटर्स को बताया, “सेबी ने वित्तीय निवेशक के रूप में आने के सरकार के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. दूरसंचार मंत्रालय को इसकी सूचना दे दी गई है.” अधिकारी ने कहा कि कनवर्जन के बाद वोडाफोन में सरकार की हिस्सेदारी 30% से अधिक हो सकती है. इसके साथ ही सरकार वोडाफोन समूह और आदित्य बिड़ला समूह के साथ कंपनी के सबसे बड़े शेयरधारकों में शामिल हो जाएगी.

सरकार बेचेगी अपनी हिस्‍सेदारी
दोनों अधिकारियों ने बताया कि सेबी ने वोडाफोन आइडिया में अपनी हिस्सेदारी को पब्लिक फ्लोट के रूप में वर्गीकृत करने के सरकार के अनुरोध को भी मान लिया है. सेबी के दिशानिर्देशों में कहा गया है कि केवल 10% तक की हिस्सेदारी को ही पब्लिक शेयरहोल्डिंग के रूप में वर्गीकृत किया जा सकता है. वहीं, इस घटनाक्रमपर वित्त मंत्रालय, दूरसंचार मंत्रालय, सेबी और वोडाफोन आइडिया ने फिलहाल कोई टिप्‍पणी नहीं की है. एक अधिकारी ने कहा कि सरकार टेलीकॉम ऑपरेटर में अपनी हिस्सेदारी बेच देगी.

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अक्टूबर 2021 में हुआ था टेलीकॉम राहत पैकेज का ऐलान
सरकार ने अक्टूबर 2021 में टेलीकॉम राहत पैकेज का ऐलान किया था. वोडाफोन आइडिया ने स्पेक्ट्रम चार्जेज और AGR बकाए को 4 सालों तक भुगतान नहीं करने का विकल्प चुना था. इन चार सालों के मोरेटोरियम के दौरान टेलीकॉम कंपनियों को इंट्रेस्ट का भुगतान करना होगा. बाद में DoT ने टेलीकॉम कंपनियों को 90 दिनों का समय और दिया. साथ ही कहा था कि अगर वे इस इंट्रेस्ट को इक्विटी में बदलना चाहते हैं तो फैसला ले सकते हैं. वोडाफोन आइडिया ने इसी अमाउंट को इक्विटी में बदलने का फैसला किया था.

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