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दुनिया

तालिबान सरकार को मान्यता देने से ईरान ने किया इन्कार, समावेशी सरकार बनाने को लेकर किया आह्वान

काबुल, एएनआइ: ईरान ने रविवार को कहा कि तेहरान मौजूदा तालिबान सरकार (इस्लामिक अमीरात) को समावेशी न होने तक मान्यता नहीं देगा। ईरानी राजदूत बहादुर अमीनियन ने काबुल में टोलो न्यूज के साथ एक विशेष इंटरर्व्यू के दौरान यह बयान दिया। अमीनियन ने कहा कि अगर इस्लामिक अमीरात अपने शासन के ढ़ाचे में कुछ सुधार लाता है तो तहरान दुनिया के बाकी देशों को अफगान सरकार को मान्यता देने के लिए राजी कर सकता है। उन्होंने कहा कि अगर कोई समूह सत्ता में आता है और समूह में एक ही जाति के लोगों को शामिल किया जाता है व बाकी जाति के सभी लोगों को सरकार में शामिल नहीं किया जाता है तो तेहरान इसे स्वीकार नहीं करता है।

ईरान का तालिबान से समावेशी सरकार बनाने का आह्वान

ईरानी राजदूत ने आगे कहा कि हम तालिबान शासकों से समावेशी सरकार बनाने का आह्वान करते हैं। टोलो न्यूज की रिपोर्ट में उन्होंने आगे कहा कि अफगानिस्तान में मौजूदा आर्थिक संकट विशेष रूप से इस्लामिक स्टेट- खुरासान (आईएस-के) के लिए चरमपंथी के रास्ते को बढ़ावा देंगे। उन्होंने आगे कहा कि अफगानिस्तान में आर्थिक समस्याएं बढ़ने से लोगों का पलायन शुरू होगा और लोग चरमपंथ का कारण बनेंगे, जिससे न केवल अफगानिस्तान बल्कि पूरे क्षेत्र को भी खतरा होगा।

तालिबान ने ईरान की टिप्पणी पर दिया जवाब

इसी बीच तालिबान ने ईरानी राजदूत अमीनियन की टिप्पणी पर बयान देते हुए कहा कि यह अफगान के मामलों में दखल देने की कोशिश है। इस्लामिक अमीरात के उप प्रवक्ता इनामुल्ला समांगानी ने ईरानी राजदूत से सवाल पूछते हुए कहा कि क्या ईरान की सरकार या कैबिनेट अन्य लोगों की समावेशी की परिभाषा पर आधारित है? उन्होंने कहा कि हर देश के राष्ट्रीय हितों पर आधारित समावेशी सरकार की अपनी परिभाषा होती है।

अंतरराष्ट्रीय मान्यता के लिए बेताब तालिबान

हिज़्ब-ए-अदालत वा तौसा के नेता सैयद जवाद हुसैनी ने कहा कि यह सरकार अफगान राष्ट्र की इच्छाओं के आधार पर समावेशी होनी चाहिए न कि विदेशी देशों के हस्तक्षेप पर आधारित होनी चाहिए। तालिबान अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त करने के लिए बेताब है, लेकिन मान्यता प्राप्त करने के लिए उसे अंतर्राष्ट्रीय समुदाय द्वारा निर्धारित शर्तों का पालन करना होगा। इसमें महिलाओं और मानवाधिकारों का सम्मान, समावेशी सरकार की स्थापना, अफगानिस्तान को आतंकवाद का सुरक्षित ठिकाना नहीं बनने देने की शर्ते शामिल हैं।

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