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रीटेल इन्फ्लेशन में कमी आने के बाद क्या RBI कर सकता है ब्याज दरों में कटौती पर विचार? | Explained

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Retail Inflation In India: भारत में रीटेल इनफ्लेशन में पिछले माह के मुकाबले इस माह में रिकॉर्ड कमी आई है. इसके बारे में पहले से ही उम्मीद की जा रही थी.

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Retail Inflation: सितंबर महीने के लिए भारत की रीटेल इनफ्लेशन (Retail Inflation), या उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित इन्फ्लेशन उम्मीदों से कम रही, जिससे अटकलें लगाई जा रही हैं कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) अपनी आगामी द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा बैठक में ब्याज रेटों पर अपने रुख पर फिर से विचार कर सकता है.

सांख्यिकी मंत्रालय द्वारा गुरुवार, 12 अक्टूबर को जारी आंकड़ों के अनुसार, भारत की रीटेल इनफ्लेशन सितंबर में घटकर 5.02% पर आ गई, जो अगस्त में 6.83% थी.

ज्यादातर एक्सपर्ट्स को उम्मीद थी कि रीटेल इनफ्लेशन 5.3% से 5.5% के बीच रहेगी. चुनिंदा खाद्य पदार्थों के दामों में रिकॉर्ड गिरावट से यह उम्मीद की जा रही थी.

इन्फ्लेशन के तीन महीने के निचले स्तर पर आने से आर्थिक मोर्चे पर सकारात्मक माना जा रहा है. खासकरके, सितंबर CPI इन्फ्लेशन रेट 5.02% है, जो RBI के कंफर्ट लेवल की सीमा 2 से 6% की ऊपरी सीमा से नीचे है.

क्या RBI ब्याज रेटों में कटौती कर सकता है?

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FY24 में रेट कट की उम्मीद नहीं की जा सकती है. एक्सपर्ट्स इस बात पर जोर देते हैं कि इस समय चल रहे जियो-पॉलिटिकल टेंशन और विंटर सीजन की फसलों (रबी फसलों) पर एल नीनो के संभावित प्रभाव से वित्तीय वर्ष 2024 में रेट में कटौती की संभावना बेहद कम है.

रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध अभी भी जारी है, इजराइल-हमास युद्ध ने कच्चे तेल की कीमतों को अस्थिर कर दिया है. कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव एक प्रमुख कारक होगा जो घरेलू इन्फ्लेशन को निर्धारित करेगा.

इसके अलावा, मानसून कमी के साथ समाप्त हुआ और लंबी अवधि के औसत की तुलना में प्रमुख जलाशयों में जल भंडारण में गिरावट आई. ऐसे में रबी की फसल पर असर पड़ सकता है.

ज्यादातर एक्सपर्ट्स का मानना है कि RBI चालू वित्त वर्ष में ब्याज रेटों में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा और 2024 में ग्लोबल अर्थव्यवस्था कमजोर होने पर ही रेटों में कटौती की जा सकती है.

इसके अलावा, जानकारों का मानना ​​है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा रेट में कटौती करने के बाद ही RBI द्वारा ब्याज दरों में कटौती करने की संभावना है, क्योंकि घरेलू आर्थिक विकास में कुछ कमजोरी आ सकती है, लेकिन यह इतना कमजोर नहीं हो सकता है कि पहले से ही रेट में कटौती को उचित ठहराया जा सके.

इन सबके अलावा, इस बात पर भी ध्यान रखना होगा कि RBI चाहता है कि इन्फ्लेशन 4% के करीब रहे, न कि केवल 2-6% की सीमा में. हाल ही में मौद्रिक नीति बैठक के बाद अपने एलान में, RBI गवर्नर शक्तिकांत दास ने इस बात पर जोर दिया कि केंद्रीय बैंक इन्फ्लेशन को 4% पर रखने का लक्ष्य बना रहा है, न कि इसे केवल 2-6% के बीच बनाए रखने का. इसमें समय लगने वाला है.

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शेयर मार्केट पर क्या होगा असर?

जानकारों के मुताबिक, CPI इन्फ्लेशन में रिकॉर्ड गिरावट का शेयर मार्केट पर पॉजिटिव प्रभाव पड़ने की संभावना है. हालांकि, इससे मार्केट की धारणा को तेज बढ़ावा मिलने की संभावना नहीं है क्योंकि इन्फ्लेशन में नरमी की उम्मीद की पहले से की जाने लगी थी.

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