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डायबिटीज, दिल और किडनी की दवाओं की कीमत में होगी कमी, मोदी सरकार बना रही ये योजना

सूत्रों का कहना है कि इसको ऐसा समझ सकते हैं कि सबसे पहले हम कैंसर से जुड़ी दवाओं के मार्जिन को कम करेंगे, साथ ही हम विशेष श्रेणी की दवाओं जैसे एंटी डायबिटिक या किडनी की बीमारी से जुड़ी दवाओं के ट्रेड मार्जिन को कम करने की घोषणा करेंगे.

नई दिल्ली: केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार (Narendra Modi Government) ट्रेड मार्जिन तय करने की योजना बना रही है. न्यूज 18 को मिली जानकारी के अनुसार इससे अहम दवाओं की कीमत में कमी लाना है. ट्रेड मार्जिन, निर्माता के उत्पाद को बेचने के लिए तय किये गए दाम और मरीज के लिए तय किये गये अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) के बीच का अंतर होता है. स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के उच्च अधिकारियों का कहना है कि इसका मकसद डायबिटीज, दिल से जुड़ी बीमारियों और किडनी की बीमारी की दवाओं की कीमत में कमी लाना है.

योजना चरणबद्ध तरीके से लागू होगी
ट्रेड मार्जिन को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा ताकि उद्योगों को बदलाव करने के लिए उचित वक्त मिल सके. सूत्रों का कहना है कि जल्दी ही इसकी घोषणा की जाएगी.

सूत्रों का कहना है कि इसको ऐसा समझ सकते हैं कि सबसे पहले हम कैंसर से जुड़ी दवाओं के मार्जिन को कम करेंगे, साथ ही हम विशेष श्रेणी की दवाओं जैसे एंटी डायबिटिक या किडनी की बीमारी से जुड़ी दवाओं के ट्रेड मार्जिन को कम करने की घोषणा करेंगे. दवाओं के दाम पर नजर रखने वाली नेशनल फार्मास्यूटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी (NPPA) इस योजना पर कई महीनों से काम कर रही है.

2018-19 में NPPA ने 42 चयनित गैर सूचीबद्ध एंटीकैंसर दवाओं के ट्रेड मार्जिन पर लगाम लगाई थी. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने लोकसभा में कहा था कि इस कदम से 526 ब्रांड की इन दवाओं की एमआरपी में 90 फीसद तक की कमी आई थी. सूत्रों का कहना है कि इस बार भी NPPA ने एक अध्ययन किया है और उसके नतीजों के आधार पर ही निर्णय लिया जाएगा.

एनपीपीए का TMR विश्लेषण
NPPA ने TMR विश्लेषण का जो अध्ययन किया उसके अनुसार, व्यवसायी का मार्जिन गोली के दाम के साथ बहुत ज्यादा बढ़ जाता है. इससे पहले मई में न्यूज 18.कॉम ने इस विश्लेषण की खबर दी थी. इसमें पाया गया था कि अगर एक गोली का दाम 2 रुपये है, तो ज्यादातर ब्रांड में इसका मार्जिन 50 फीसद होगा. जबकि अगर इसी गोली की कीमत 15 और 25 रुपये है तो मार्जिन 40 फीसद से कम रहता है.

ऐसी दवाएं जिनकी कीमत 50-100 रुपये प्रति गोली की श्रेणी में आती हैं उनमें से कम से कम 2.97 फीसद का ट्रेड मार्जिन 50 फीसद से 100 फीसद रहता है. जबकि 1.25 फीसद का मार्जिन 100 फीसद से 200 फीसद और 2.41 फीसद का मार्जिन 200 और 500 फीसद के बीच होता है.

NPPA की प्रस्तुति के अनुसार अगर किसी दवा का दाम प्रति गोली 100 रुपये है तो उसे महंगी दवा की श्रेणी में रखा जाता है और उनमें 8 फीसद का मार्जिन करीब 200 से 500 फीसद, 2.7 फीसद का मार्जिन 500-1000 फीसद और 1.48 का मार्जिन 1000 फीसद से ज्यादा होता है.

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