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सस्‍ती दवा चाहिए तो यहां से खरीदें, 2250 की दवाई बस 250 रुपये में, लागत की सिर्फ 8% पर बिकती हैं मेडिसिन

अस्‍पताल और दवाओं का खर्च इतना बढ़ गया है कि गरीबों और आम आदमी के लिए किसी गंभीर बीमारी का इलाज कराना बेहद मुश्किल हो गया है. इस समस्‍या को हल करने के लिए ही सरकार ने देशभर में जेनरिक दवाएं बेचने की शुरुआत की थी.

नई दिल्‍ली. कोरोनाकाल के बाद देश में दवाओं का दाम और मेडिकल खर्च दोगुने से भी ज्‍यादा बढ़ गया है. गरीब और आम आदमी के लिए तो किसी जटिल बीमारी का इलाज कराना और दवाओं का खर्च उठाना ही मुश्किल हो गया है. ऐसे में अगर आप किसी ऐसी दुकान की तलाश में हैं, जहां आपको सस्‍ती दर पर दवाएं मिल सकें तो हम आपकी इस समस्‍या का हल लेकर आए हैं. इन दुकानों पर किसानों और गरीबों को बेहद सस्‍ती कीमत पर दवाएं उपलब्‍ध कराई जाती हैं.

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दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल से देशभर में जन औ‍षधि केंद्र (jan Aushadhi Kendra) खोले गए हैं. इन सब्सिडी प्राप्‍त मेडिकल स्‍टोर पर दवाओं को उनकी लागत के महज 8 से 30 फीसदी मूल्‍य पर बेचा जाता है. आप इसी बात से अंदाजा लगा सकते हैं कि इस स्‍टोर पर कैंसर की महंगी दवाइयां भी बेहद मामूली मूल्‍य पर मिल जाती हैं. ऐसा भी नहीं है कि ये मेडिकल स्‍टोर सिर्फ चुनिंदा जगहों पर खोले गए हैं. देश के लगभग सभी छोटे-बड़े शहरों में अब तक जन औषधि केंद्र खोले जा चुके हैं. इन केंद्रों पर जेनरिक दवाएं ही बेची जाती हैं.

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क्‍या होती हैं जेनरिक दवाएं
जेनेरिक दवाओं से आशय ऐसी मेडिसिन से हैं, जिनकी पेटेंट अवधि समाप्त हो गई हो. ये दवाएं ब्रांडेड दवाओं की तरह प्रभावी होती हैं, लेकिन साथ ही काफी सस्ती भी होती हैं. इन दवाओं में उनके शोध की लागत शामिल नहीं होती. सिर्फ प्रोडक्‍शन लागत का 8 से 30 फीसदी हिस्‍सा ही वसूला जाता है.

कहां बिकती हैं ये सस्‍ती दवाएं
केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह ने सोमवार को बताया कि देशभर में लगभग 241 प्राथमिक कृषि सहकारी ऋण समितियों (पीएसीएस) ने जन औषधि केंद्र खोले हैं. अब तक सरकार के जन औषधि केंद्र बड़े पैमाने पर शहरों में खोले जाते थे, जिससे शहरी गरीबों को फायदा होता था. लेकिन, अब यह लाभ ग्रामीण गरीबों तक पहुंचाया जा रहा है.

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ग्रामीण इलाकों में ये केंद्र खुलने से लोग अब किफायती दरों पर जेनेरिक दवाएं खरीद सकते हैं. उदाहरण के लिए, कैंसर की दवा जिसकी कीमत खुले बाजार में लगभग 2,250 रुपये है, यहां 250 रुपये में बेची जाती है. यहां तक ​​कि ग्रामीण लड़कियां भी इन केंद्रों से एक रुपये में सैनिटरी नैपकिन खरीद सकती हैं.

गरीबों के बचे 26 हजार करोड़ रुपये
अमित शाह ने कहा कि नरेन्द्र मोदी सरकार ने गरीबों को लागत के 8-30 प्रतिशत पर दवाएं सुनिश्चित करने के लिए जन औषधि केंद्रों को शुरू किया है. बीते 9 साल में इसकी मदद से गरीबों ने दवाओं पर ही 26 हजार करोड़ रुपये से ज्‍यादा की बचत की है. वर्तमान में देश में करीब 63 हजार पीएसीएस चल रहे हैं, जो लगभग हर छोटे-बड़े शहरों और कस्‍बों में जन औषधि केंद्र संचालित करते हैं.

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