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आरबीआई के रेपो रेट में बदलाव नहीं करने से रियल स्टेट कारोबारियों को राहत, खरीदारों का बढ़ेगा भरोसा

आरबीआई के रेपो रेट में बदलाव नहीं करने से रियल स्टेट कारोबारियों को राहत मिली है. इससे खरीदारों का भरोसा बढ़ेगा.

RBI MPC Meeting: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) के रेपो दर को 6.5 प्रतिशत पर रखने के फैसले से रियल एस्टेट कारोबारियों को राहत मिली है. एक सर्वसम्मत निर्णय में, एमपीसी ने गुरुवार को रेपो दर (वह दर जिस पर आरबीआई बैंकों को उधार देता है) कोई बदलाव नहीं करने का निर्णय लिया.

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स्टर्लिंग डेवलपर्स के अध्यक्ष और एमडी, रमानी शास्त्री ने कहा, “दरों को बनाए रखने के आरबीआई के फैसले का स्वागत है. इससे खरीदारों का विश्वास बढ़ेगा, खासकर बार-बार बढ़ोतरी के बाद उनकी अधिग्रहण लागत पहले ही बढ़ चुकी थी.”

हाल के दिनों में रेपो दरों में वृद्धि के कारण होम लोन की ब्याज दरें पहले से ही 9.5 प्रतिशत और उससे अधिक के खतरनाक उच्च स्तर पर हैं. एक और बढ़ोतरी आवास ऋण की ब्याज दरों को दोहरे अंकों में ले जाती.

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होम लोन की ब्याज दरों पर एक और वृद्धि के प्रभाव पर उद्योग के कई कारोबारियों ने अपने विचार व्यक्त किए थे.

गौरतलब है कि आरबीआई ने पिछले साल के मई माह से रेपो रेट में 250 बीपीएस की बढ़ोतरी कर चुका है. इससे होम लोन की दरें पहले से ही उच्च स्तर पर हैं. जिससे घर खरीदार नया घर लेने से कतराने लगे हैं. जिससे घरों बिक्री पर नकारात्मक असर हुआ है. घरों की बिक्री में कमी आने से और चीजों की खपत कम होने का डर बना रहता है. खपत कम होने से मांग पर असर होता है. मांग में कमी आने से उत्पादन घटाना पड़ता है. उत्पादन में कटौती से कंपनियां कर्मचारियों की छंटनी करने लगती हैं. कर्मचारियों की छंटनी का असर यह होता है कि समग्र सेक्टर में मांग में कमी आने लगती है. जिसका अर्थव्यवस्था पर गहरा असर होता है.

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नहीं बढ़ेगी लोन की ईएमआई

आरबीआई की द्विमासिक मौद्रिक नीति की समीक्षा बैठक के नतीजों के बाद रेपो रेट को 6.50 फीसदी पर बरकरार रखने का फैसला किया है. जिससे लोन की ईएमआई का बोझ नहीं बढ़ेगा. हालांकि, आरबीआई का कहना है कि यह फैसला केवल इस बार के लिए है. अगर परिस्थितियां प्रतिकूल हुईं तो अगली बार फिर से इसमें बदलाव किया जा सकता है.

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क्या होता है रेपो रेट?

रेपो दर वह दर है जिस पर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) सरकारी प्रतिभूतियों के विरुद्ध भारत में वाणिज्यिक बैंकों या वित्तीय संस्थानों को पैसा उधार देता है. फिलहाल रेपो रेट 6.50 फीसदी है. रेपो रेट में बदलाव से बाजार में पैसे का प्रवाह प्रभावित होता है.

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