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Byju Layoffs: एक बार फिर कर्मचारियों की छंटनी की तैयारी में बायजू, 4000-5000 लोगों पर गिरेगी गाज

एडटेक कंपनी बायजू द्वारा एक बार फिर छंटनी की तैयारी की जा रही है. कंपनी की संचालक थिंक एंड लर्न प्राइवेट लिमिटेड छंटनी करेगी. हालांकि, इससे आकाश इंस्टीट्यूट्स को अलग रखे जाने की उम्मीद है.

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नई दिल्ली. बायजू के सीईओ अर्जुन मोहन ने रीस्ट्रक्चरिंग की शुरुआत कर दी है. इसके तहत 4 से 5 हजार कर्मचारियों की नौकरी पर तलवार लटकती दिख रही है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह छंटनी थिंक एंड लर्न प्राइवेट लिमिटेड में होगी जो बायजू की संचालक है. हालांकि, इसमें आकाश इंस्टीट्यूट्स को शामिल नहीं किया जाएगा. जिसे बायजू ने करीब 1 अरब डॉलर देकर खरीदा था.

मोहन को हाल ही में कंपनी का सीईओ बनाया गया था. वह काफी लंबे समय से बायजू के साथ हैं. मोहन ने शीर्ष अधिकारियों को इस बारे में बताया है. छंटनी का असर कई विभागों में देखने को मिल सकता है. इसमें सेल्स, मार्केटिंग और कई अन्य विभाग शामिल हो सकते हैं.

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संकट के बादल
बायजू में यह पहली छंटनी नहीं है. इसी साल की शुरुआत में भी बायजू हजारों लोगों को बाहर का रास्ता दिखा चुका है. बायजू इस वक्त पैसों की तंगी से जूझ रहा है. कंपनी अपनी कई सहायक इकाइयों को बेचने के मौके तलाश रही है. कई ऑफिस खाली किये जा चुके हैं. इसके अलावा बायजू कंपनी की लिक्विडिटी की परेशानी को खत्म करने के लिए बाहरी फंडिंग की भी बांट देख रही है. इसी महीने की शुरुआत में कंपनी ने अपने कर्जदाताओं को एक प्रस्ताव भेजा था कि वह अगले 6 महीने में 1.2 अरब डॉलर का पूरा कर्ज चुका देगी. वहीं, अगले 3 महीने में 30 करोड़ डॉलर का लोन चुकाने का भी वादा किया था. कंपनी रिस्ट्रक्चरिंग के साथ 2 सहायक इकाइयों को बेचने की फिराक में है. यह इकाइयां हैं ग्रेट लर्निंग और यूएस आधारित एपिक. इन्हीं को बेचकर कर्ज चुकाने की तैयारी चल रही है.

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नहीं मिल रही फंडिंग
बायजू दुनिया की सबसे बड़ी एडटेक कंपनी है जिसका मार्केट वैल्यूएशन 22 अरब डॉलर है. हालांकि, अभी तक कंपनी कोई भी फंडिंग जुटा नहीं पाई है जबकि प्रयास इस साल की शुरुआत से किया जा रहा है. संभव है कि इसे डेविडसन केंपनर से स्ट्रक्चर्ड इस्ट्रूमेंट्स के तहत 25 करोड़ डॉलर की फंडिंग मिल भी जाए लेकिन यूएस की एएमसी से 15 करोड़ डॉलर की फंडिंग की बातचीत ठंडे बस्ते में चली गई है. बायजू अपने पुराने निवेशक रंजन पाई से भी आकाश एजुकेशनल सर्विस के लिए फंडिंग की तलाश कर रही है. संभव है कि पाई रविंद्रन के हिस्से में से कुछ हिस्सेदारी खरीद सकते हैं.

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