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केंद्र ने 16 राज्यों को दिया ब्याज मुक्त लोन, 50 साल के लिए 56,415 करोड़, सबसे ज्यादा पैसा बिहार-एमपी को मिला

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वित्त मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि व्यय विभाग ने चालू वित्त वर्ष में इस योजना के तहत 16 राज्यों को 56,415 करोड़ रुपये के पूंजी निवेश प्रस्तावों को मंजूरी दी गई है. सबसे ज्यादा राशि 9640 करोड़ रुपये की राशि बिहार को मिली है.

नई दिल्ली. वित्त मंत्रालय ने बजट में घोषित विशेष सहायता योजना के तहत चालू वित्त वर्ष में 16 राज्यों के लिए 56,415 करोड़ रुपये के पूंजी निवेश प्रस्तावों को मंजूरी दे दी है. वित्त वर्ष 2023-24 के बजट में राज्यों के स्तर पर पूंजीगत व्यय को बढ़ावा देने के लिए ‘पूंजीगत निवेश को लेकर राज्यों को विशेष सहायता’ योजना की घोषणा की गई थी.

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इस योजना के तहत राज्यों को वित्त वर्ष 2023-24 में 1.3 लाख करोड़ रुपये तक की राशि 50 साल के ब्याज-मुक्त ऋण के रूप में दी जा रही है. वित्त मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि व्यय विभाग ने चालू वित्त वर्ष में इस योजना के तहत 16 राज्यों को 56,415 करोड़ रुपये के पूंजी निवेश प्रस्तावों को मंजूरी दे दी है.

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विभिन्न क्षेत्रों में पूंजी निवेश परियोजनाओं को मंजूरी
स्वास्थ्य, शिक्षा, सिंचाई, जल आपूर्ति, बिजली, सड़क, पुल और रेलवे सहित विभिन्न क्षेत्रों में पूंजी निवेश परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है. इन क्षेत्रों में परियोजनाओं की गति बढ़ाने के लिए जल जीवन मिशन और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत राज्यों का हिस्सा भी दिया गया है. वित्त मंत्रालय ने पिछले वित्त वर्ष में भी इसी तरह की एक योजना संचालित की थी. उस योजना के तहत वित्त वर्ष 2022-23 में 95,147.19 करोड़ रुपये के पूंजी निवेश प्रस्तावों को मंजूरी देने के साथ राज्यों को 81,195.35 करोड़ रुपये की राशि जारी की गई.

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राज्यों को पूंजीगत निवेश के लिए वित्तीय सहायता देने की योजना सबसे पहले कोविड-19 महामारी के दौरान वित्त वर्ष 2020-21 में चलाई गई थी. इस योजना को 8 भागों में बांटा गया है – पहला भाग 1 लाख करोड़ रुपये के आवंटन के साथ सबसे बड़ा है. यह राशि 15वें वित्त आयोग के निर्णय के अनुसार राज्यों के बीच केंद्रीय करों और कर्तव्यों में उनकी हिस्सेदारी के अनुपात में आवंटित की जाएगी. योजना के अन्य भाग या तो सुधारों से जुड़े हैं या क्षेत्र विशेष से जुड़ी परियोजनाओं के लिए हैं.

वित्त मंत्रालय द्वारा इस योजना के तहत सबसे ज्यादा राशि 9640 करोड़ रुपये बिहार को, मध्य प्रदेश को 7850 करोड़ रुपये, पश्चिम बंगाल को 7523 करोड़ रुपये, राजस्थान को 6026 करोड़ रुपये, ओडिशा को 4528 करोड़ रुपये, तमिलनाडु को 4079 करोड़ रुपये, कर्नाटक को 3647 करोड़ रुपये, गुजरात को 3478 करोड़ रुपये और छत्तीसगढ़ को 3195 करोड़ रुपये मिलेंगे.

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