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झारखण्ड

Jharkhand, Elections: चुनाव में अगर आपकी गाड़ी का कोई इस्तेमाल हुआ है, तो पढ़ें ये बड़ी खबर…

Jharkhand Chunav 2022 चुनाव में इस्तेमाल किए जानेवाले वाहनों का डाटा आनलाइन किया जाएगा। ताकि उनके मालिकों की पहचान कर समय पर भुगतान दिया जा सके। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय ने इवेंट व्हीकल मैनेजमेंट सिस्टम बनाया है जिसका मांडर उपचुनाव से लेकर आगामी चुनावों में उपयोग किया जाएगा।

रांची, राज्य ब्यूरो। Jharkhand Chunav 2022 अब लोकसभा तथा विधानसभा चुनाव में इस्तेमाल किए जानेवाले निजी वाहनों के लिए वाहन मालिकों काे समय पर निर्धारित किराया का भुगतान किया जाएगा। इसे लेकर लिए मंत्रिमंडल निर्वाचन विभाग के अधीन कार्यरत मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय ने इवेंट व्हीकल मैनेजमेंट सिस्टम का एक एप विकसित किया है, जिसके माध्यम से वाहनों के इस्तेमाल से लेकर राशि के भुगतान में आनलाइन व्यवस्था लागू की जाएगाी। इसकी शुरुआत मांडर उपचुनाव से होगी। इसे बाद के चुनावों में भी लागू किया जाएगा।

मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रविकुमार ने विधानसभा के मांडर उपचुनाव में प्रयुक्त वाहनों का डाटाबेस तैयार करने एवं अधिग्रहित वाहनों का त्वरित भुगतान के लिए उक्त हाइटेक प्रणाली को लेकर गुरुवार को वाहन कोषांग से जुड़े संबंधित पदाधिकारियों की बैठक की। इसमें व्यापक विचार-विमर्श के बाद एप की रूपरेखा को अंतिम रूप दिया गया। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने कहा कि इस सिस्टम के उपयोग से वाहनों का ससमय भुगतान सुनिश्चित होगा और किसी भी तरह के विवाद की गुंजाइश नहीं रहेगी।

चुनाव के दौरान उपयोग में लिए जानेवाले वाहनों का पूरा डाटा इवेंट व्हीकल मैनेजमेंट सिस्टम एप के माध्यम से आनलाइन हो जाएगा। साथ ही वाहन मालिक को एसएमएस से भी उनकी गाड़ी के बारे में सूचित किया जाएगा। वाहन का नंबर, वाहन मालिक का नाम और पता, चुनाव कार्य के लिए वाहन को कब और कहां अधिग्रहित किया गया इसकी जानकारी दी जाएगी।

चुनाव में इस्‍तेमाल के लिए वाहन के कब्जे में लेने से लेकर मुक्त करने वक्त की मीटर रीडिंग के अलावा वाहन में उपयोग किए जानेवाले पेट्रोल और डीजल का हिसाब सभी कुछ आनलाइन दर्ज हाेगा। इसे वाहन मालिक भी देख सकेंगे। वाहन मालिक को भुगतान से संबंधित चेक का ब्योरा भी आनलाइन प्रदर्शित किया जाएगा। बता दें कि चुनाव में इस्तेमाल किए जानेवाले वाहनों के भुगतान लंबित रहने तथा कम राशि के भुगतान की शिकायत मिलती रहती है। नई व्यवस्था से यह समस्या दूर होगी।

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