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पेट्रोल-डीजल को GST के दायरे में लाने पर घटेंगे दाम, लेकिन लाख टके का सवाल, कहां से होगी राज्यों के नुकसान की भरपाई?

If petrol comes under gst what will be the price: महंगाई को घटाने के लिए यह एक बेहतरीन उपाय हो सकता है कि पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के दायरे में लाया जाए. इससे कीमतें कम हो जाएंगी जिससे परिवहन लागत कम हो जाएगी, जिससे महंगाई पर काबू पाया जा सकता है, लेकिन लाख टके का सवाल जिसका जवाब आज तक नहीं मिला, वह यह है कि इससे होने वाले नुकसान की भरपाई कहां से की जाएगी?

If Petrol Comes Under GST What Will Be The Price: जीएसटी (GST) लागू किए जाने के बाद से, ज्यादातर लोगों के मन में एक सवाल उठता रहा है कि पेट्रोल-डीजल को जीएसटी (GST) के दायरे से बाहर क्यों रखा गया? इस सवाल के जवाब में जीएसटी परिषद (GST Council) की तरफ से कोई ठोस जवाब आज तक नहीं मिल पाया. हालांकि, हाल के घटनाक्रम से संकेत मिलता है कि जीएसटी परिषद (GST Council) को पेट्रोलियम उत्पादों को जीएसटी के दायरे में लाने पर विचार किया जा सकता है.

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28 जून को होगी जीएसटी परिषद की बैठक

28-29 जून को चंडीगढ़ में जीएसटी परिषद की बैठक होने जा रही है, जिसमें कुछ वस्तुओं की जीएसटी दरों में बदलाव किए जाने की संभावना जताई जा रही है. केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में सभी राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधियों की जीएसटी परिषद की 47वीं बैठक होगी. परिषद की बैठक छह महीने बाद हो रही है.

जीएसटी परिषद की बैठक के पहले पीएम के आर्थिक सलाहकार परिषद के चेयरमैन विवेक देबरॉय ने पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के दायरे में शामिल करने की संभावना जताई है. विवेक देबरॉयन इस बात की वकालत की है कि पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के दायरे में लाने पर बढ़ती महंगाई पर लगाम लगाना संभव होगा

वित्त विधेयक 2021 पर डिबेट के दौरान भाजपा सांसद सुशील मोदी ने कहा था कि इससे राज्यों को सामूहिक रूप से 2 लाख करोड़ का सालाना नुकसान होगा.

जबकि पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी का कहना है कि अगर पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के दायरे में लाया जाता है तो केंद्र सरकार को खुशी होगी. लेकिन ऐसा नहीं करना चाहते हैं.

बता दें, देश में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) को एक जुलाई 2017 से लागू किया गया था और राज्यों को जीएसटी के कार्यान्वयन के कारण होने वाले किसी भी राजस्व के नुकसान के एवज में पांच साल की अवधि के लिए क्षतिपूर्ति का आश्वासन दिया गया था.

वर्तमान कर व्यवस्था के तहत, उत्पादन के हर चरण पर केंद्र और राज्य के शुल्क के कारण, देश में डीजल और पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में वृद्धि हुई है.

उपयुक्त समय की प्रतीक्षा में जीएसटी परिषद

भारत सरकार पहले ही यह जवाब दे दिया है कि फिलहाल कच्चे पेट्रोलियम, डीजल, पेट्रोल, प्राकृतिक गैस और विमानन टर्बाइन ईंधन को माल और सेवाओं के दायरे में शामिल करने का कोई प्रस्ताव नहीं है.

“लोकसभा में एक लिखित उत्तर में, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि “जीएसटी परिषद ने जीएसटी के तहत इन वस्तुओं को शामिल करने के लिए कोई सिफारिश नहीं की है.” उन्होंने कहा कि परिषद राजस्व निहितार्थ सहित प्रासंगिक कारकों को ध्यान में रखते हुए उचित समय पर इन पेट्रोलियम उत्पादों को शामिल करने के मुद्दे पर विचार कर सकती है.”

हालांकि, पेट्रोल और डीजल को जीएसटी के भीतर पेश करना राजनीतिक कार्रवाई है और यह केंद्र और राज्यों दोनों द्वारा लिए गए निर्णयों के अनुसार होना चाहिए.

सभी लगाए गए करों के बाद, पेट्रोल और ईंधन पर कर लगाने के बाद अंतिम कीमत पूर्व-कर परिदृश्य से 50 प्रतिशत अधिक है. ईंधन के अलावा अन्य वस्तुओं और सेवाओं पर जीएसटी के बारे में बात करते हुए, पूर्व-जीएसटी युग के समान सीमाओं और स्तरों के भीतर रखा गया है.

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पेट्रोल-डीजल को GST के दायरे में लाने के लिए राज्यों का समर्थन नहीं

वित्त मंत्रालय ने कहा है कि देश भर के अधिकांश राज्यों ने अज्ञात कारण से पेट्रोल और डीजल को जीएसटी योजना में शामिल नहीं करने की बात करते हैं. अभी तक, पेट्रोल और डीजल जीएसटी के दायरे से बाहर हैं और कर लगाने के उद्देश्य से पूरी तरह से राज्य सरकार के अधीन हैं.

उपरोक्त बिंदुओं को ध्यान में रखते हुए, राज्य पेट्रोल और डीजल से उत्पन्न वैट राजस्व को छोड़ा जा सकता है. लेकिन लाख टके का सवाल बना रहेगा. इससे राज्यों को होने वाले आर्थिक नुकासन की भरपाई कहां से होगी यानी राजस्व कहां से आएगा?

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