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RBI ने बैंक, NBFC के वैकल्पिक इन्वेस्टमेंट फंड में निवेश से जुड़े सर्कुलर को किया संशोधित, कुछ जरूरतों को किया गया कम

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रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने बैंकों और NBFC के लिए वैकल्पिक इन्वेस्टमेंट फंड में इन्वेस्टमेंट को लेकर पूर्व में जारी सर्कुलर में कुछ बदलाव किया है.

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भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बुधवार को बैंकों और NBFC के लिए वैकल्पिक इन्वेस्टमेंट कोष में (AIF) में इन्वेस्टमेंट को लेकर पूर्व में जारी सर्कुलर में कुछ बदलाव किया है. इस मामले में मिली प्रतिक्रया के बाद कुछ जरूरतों को कम किया गया है.

केंद्रीय बैंक ने कहा कि संशोधन RBI के दायरे में आने वाली इकाइयों (बैंक, NBFC और अन्य वित्तीय संस्थान) के बीच क्रियान्वयन में एकरूपता सुनिश्चित करने और संबंधित पक्षों से प्राप्त विभिन्न प्रतिवेदनों में चिह्नित चिंताओं को दूर करने के नजरिये से किये गये हैं.

RBI ने दिसंबर 2023 में बैंकों, कर्ज देने वाली गैर-बैंकिग वित्तीय इकाइयों (NBFC) और अन्य वित्तीय संस्थानों के ऑप्शनल इन्वेस्टमेंट फंड सेक्टर में इन्वेस्टमेंट को नियंत्रित करने के मकसद से सर्कुलर जारी किया था. इसका इस्तेमाल पुराने कर्ज को लेकर डिफाल्ट से बचने के लिए नये कर्ज दिये जाने (Evergreening Of Loan) को लेकर चिंता के बीच यह कदम उठाया गया था.

शुरुआती चिंताओं के अनुसार, AIF में बैंक और NBFC के इन्वेस्टमेंट का उपयोग ऋण चुकाने के उपाय के रूप में किया गया था. ऐसा नहीं होने पर उसे गैर-निष्पादित संपत्ति में वर्गीकृत किया जाता. बैंकों और वित्तीय संस्थानों के इन्वेस्टमेंट के बाद AIF देनदार कंपनी में इन्वेस्टमेंट करता, जिससे संबंधित इकाई को कर्ज के मोर्चे पर राहत मिल जाती.

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केंद्रीय बैंक के स्पष्टीकरण के बाद, AIF योजना में बैंक और NBFC के इन्वेस्टमेंट की सीमा तक ही प्रावधान की आवश्यकता होगी. न कि AIF योजना में इन वित्तीय संस्थानों के संपूर्ण इन्वेस्टमेंट पर प्रावधान करना होगा.

संशोधित सर्कुलर में कहा गया है कि ‘डाउनस्ट्रीम इन्वेस्टमेंट’ में RBI के दायरे में आने वाले वित्तीय संस्थानों की देनदार कंपनी के इक्विटी शेयरों में इन्वेस्टमेंट शामिल नहीं होगा. लेकिन इसमें हाइब्रिड उत्पादों में इन्वेस्टमेंट समेत अन्य सभी इन्वेस्टमेंट शामिल होंगे.

किसी भारतीय कंपनी (जो विदेशियों के स्वामित्व या नियंत्रण में है) के किसी अन्य भारतीय इकाई में इन्वेस्टमेंट को अप्रत्यक्ष विदेशी इन्वेस्टमेंट माना जाता है. इसे ‘डाउनस्ट्रीम’ इन्वेस्टमेंट के रूप में भी जाना जाता है.

कॉमर्शियल बैंकों, को-ऑपरेटिव लेंडर्स, हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों और अन्य वित्तीय संस्थानों सहित NBFC से संबद्ध संशोधित सर्कुलर में कहा गया है कि पूंजी से कटौती वित्तीय संस्थानों की टियर -1 (शेयर पूंजी) और टियर -2 पूरक पूंजी (Supplementary Capital) से समान रूप से होगी.

संशोधित सर्कुलर में स्पष्ट किया गया है कि ‘फंड ऑफ फंड्स’ या म्यूचुअल फंड जैसे मध्यस्थों के माध्यम से AIF में RBI के दायरे में आने वाली इकाइयों का इन्वेस्टमेंट इस सर्कुलर के दायरे में नहीं है.

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गौरतलब है कि बैंकों और NBFC को अपने AIF इन्वेस्टमेंट के मुकाबले 100 प्रतिशत प्रावधान करना था और कई वित्तीय संस्थाओं को इस आवश्यकता के कारण मुनाफे पर असर पड़ रहा था.

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